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©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

टूटकर जब कोई बिखरता है।

    देर    तक   आसमां   बरसता   है। टूटकर   जब   कोई  बिखरता  है।   आ भी  जाओ   तुम्हें   कसम  मेरी, […]

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

वो हमे याद आने लगे।

    जब   कोई  भी  सताने  लगे। वो   हमे    याद   आने   लगे।   आपको दिल दिया रहने को, आप 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

कोई अपना कहीं नहीं लगता।

  जिसको समझा वहीं नहीं लगता। कोई  अपना  कहीं  नहीं  लगता।   सिर्फ़   अब   है  जहाँ-तहाँ  साया, आदमी   आदमी   नहीं 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

मैं वहीं हूँ जो तू चाहता है।

  तेरी   मर्ज़ी   है   तेरी   रज़ा   है। मैं   वहीं   हूँ  जो  तू  चाहता  है।   तेरे  ही   चाहने  से  है 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

हर शख़्स मुझको आज़माने को मिला।

  जब भी कोई  रिश्ता  निभाने  को  मिला। हर शख़्स मुझको  आज़माने  को  मिला।   वो सबसे  सस्ती  चीज़  जो 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

कभी किसी से मेरे दिल न दिल लगाना तुम।

वफ़ा की राह  कठिन  है  वहाँ  न  जाना  तुम। कभी किसी से मेरे दिल न दिल  लगाना  तुम। जिधर   भी 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

कब बदल दे कौन जाने है यहाँ पैसा किसी को।

  तुमने देखा है कहीं भी   एक हीं  जैसा  किसी  को। कब बदल दे कौन जाने है  यहाँ  पैसा  किसी 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

उसकी आँखों में सजा के दो जहाँ देखेंगे।

  सोचते  थे   कि  सदा  उस  को  जवाँ  देखेंगे। उसकी आँखों में  सजा  के  दो  जहाँ  देखेंगे।   देखते  थे 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

नाम उसका लबों पे आया है।

    आज फिर से वो  याद  आया  है। नाम  उसका  लबों  पे  आया  है।   जिस को अपना समझ

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

कौन जीता है यहाँ अब ज़िंदगी को

  कौन जीता  है  यहाँ  अब  ज़िंदगी को। यह तरक़्की खा  गई है इस  सदी  को।   सब   मशीनी   कारवाई 

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