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©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', सुझाव

जीवन का उद्देश्य क्या है?

जीवन का उद्देश्य क्या है? कल मैं एक सवाल सर्च किया गूगल पर। सवाल था, जीवन का उद्देश्य क्या है? […]

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', मुक्तक

मुक्तक

ज़मीं को आसमाँ जितना  जहाँ में कौन समझेगा।मुझे   मालूम  है  लोगो  वो  मेरा  मौन   समझेगा।जिसे मैं दिल समझता  हूँ जिसे

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', रुबाई

रुबाई

कि हम चाहें अगर तो इस जहाँ में क्या नहीं होता।मगर दिल बे- ग़रज़ कोई यहाँ  अपना  नहीं  होता।सितम ये

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', क़ता

क़ता

कित’ने हिस्सों में  बट गई ज़िंदगी।किस से जा के लिपट गई ज़िंदगी।वक्त  सोचा  था  बीत  जाए  मगर,वक्त कटना था कट 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', क़ता

क़ता

1. दिल को है तिरे जिस पे अब नाज़ कभी मैं था।तेरी  दुनिया  में  जो   है  आज   कभी   मैं  था।यूँ 

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', क़ता

क़ता

1.सुना है तुम अकेले में बहुत फ़रयाद करती हो।नहीं हूँ मैं कहो तुम अब किसे बर्बाद करती हो।बिछड़कर भूल जाना

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', ग़ज़ल

सजाए बैठे हैं हम रात की महफ़िल।

  सजाए   बैठे  हैं   हम  रात  की  महफ़िल।कि है तू ही नहीं  किस बात की महफ़िल।सभी किस्से   सभी  सौग़ात की

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', छंद मुक्त कविता

बढ़ते चलो

अश्रुजल में डूब जाना स्वभाव है शरीर कामन से पर भयभीत ना हो भाव है फकीर काइस जगत में कौन

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', छंद मुक्त कविता

भारत का गणतंत्र यही है

आओ सुनाऊँ तुमको बाबुएक है चोर एक है साधुचोर यहाँ सिंघासन पातासाधु को वन मिल जाताजिसने यह न्याय किया हैठीक-ठीक

©️संदीप कुमार तिवारी 'श्रेयस', छंद मुक्त कविता

कितने भगवान्

मुल्ला कहे कि खुदा बड़ा हैहिंदू कहे कि रामसिख कहे कि बड़े हैं बाबा इसाई जीसस ले मानबता दो हैं

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