रुबाई
कि हम चाहें अगर तो इस जहाँ में क्या नहीं होता।मगर दिल बे- ग़रज़ कोई यहाँ अपना नहीं होता।सितम ये […]
कि हम चाहें अगर तो इस जहाँ में क्या नहीं होता।मगर दिल बे- ग़रज़ कोई यहाँ अपना नहीं होता।सितम ये […]
कित’ने हिस्सों में बट गई ज़िंदगी।किस से जा के लिपट गई ज़िंदगी।वक्त सोचा था बीत जाए मगर,वक्त कटना था कट
1. दिल को है तिरे जिस पे अब नाज़ कभी मैं था।तेरी दुनिया में जो है आज कभी मैं था।यूँ
छल माया अविचल प्रबल, गरल नेह संसार।सहज सत्य परब्रह्म सुख,भज मन तू निर्विकार।। छल माया अविचल प्रबल, गरल नेह संसार।सहज
नाम सुनाम करें जग में शिव|प्रीत सुधा हिय में नटनागर|| मोहकता मकरंद मनोहर |ध्यान धरे मन
कहें कैसे कि मेरे नैन तर नहीं होते।किसी की याद में हम रातभर नहीं सोते। नहीं मालूम कब हम
सुना है सबको भा चुका हूँ मैं।बहुत ठोकर अब खा चुका हूँ मैं। उडा करता था आसमां में पर,जमीं
1.सुना है तुम अकेले में बहुत फ़रयाद करती हो।नहीं हूँ मैं कहो तुम अब किसे बर्बाद करती हो।बिछड़कर भूल जाना
दिल में गर्दिश-ए-चमन भरते हैं।हम अपने होने ‘का’ दम भरते हैं। खुश रह लेंगे आज दुःख है तो कल,हर दिन