दिवाली दोहा
दीप दिवाली के जले, रोशन हो संसार |वर्षण हो धन धान के, खुशियाँ अपरंपार || प्रीत मिलन जग रास की, […]
दीप दिवाली के जले, रोशन हो संसार |वर्षण हो धन धान के, खुशियाँ अपरंपार || प्रीत मिलन जग रास की, […]
प्रीत पगा मन बावरा, देख रहा पथ आज।मिल जाए साजन अभी, या विष पीलूँ आज।। बरस रहे है बादरा, या
शरद आगमन की घड़ी, शीतल मन्द बयार।धूप गुनगुनी नेह सी, मादक गंध बहार।। छाँव लगे ये ठिठुरती, धूप दुपहरी भाए।मन
नाम से तेरे सौ बार तोड़ा हमनेएक ही दिल को कइ बार तोड़ा हमने। टूटती है इक शै रोज अब
जिस्म तन्हा है रूह प्यासी है।जिंदगी में यूँ बदहवासी है। जा रहा है क्या खाए मुझको,याद है
जब से हम उनसे बिछड़े हैं ज़िंदगी शरारत लगती है।हर शै से रूठा करते हैं हर ‘शै’ में बगावत लगती
तेरी उलफ़त में सनम उम्र गवाना क्या है।जिंदा रहने को मगर और बहाना क्या है। तूं मेरी जां है
यूँ दिल की दुनिया में आ के कभी वैसे कभी न जाता है कोई,वो तो भूल गया है जैसे कि
कहाँ किसी पे कभी ऐतबार होता है।कहाँ किसी का जमाने में यार होता है। वो शौक या है जरूरत