अब वो शख़्स मुड़ के कभी भी इक नज़र नहीं देखता।
मिलता है मुझे और फिर मेरे इधर नहीं देखता।अब वो शख़्स मुड़ के कभी भी इक नज़र नहीं देखता। मसला […]
मिलता है मुझे और फिर मेरे इधर नहीं देखता।अब वो शख़्स मुड़ के कभी भी इक नज़र नहीं देखता। मसला […]
मैं मेरे बयानात से फिर जाऊँ, नहीं कसम है मुझे मेरी जजबातों की।बहकती निगाहो की कसम हैतड़पती आहों की कसम
है ऐसा काम जो अब आदमी नहीं करता।वफ़ा कहीं भी किसी से कोई नहीं करता। मुझे नहीं थी ख़बर
ऐसा नहीं कि तुम ही सबसे महान बनना।पहले जमीन बनना फिर आसमान बनना। यह भी नहीं कि कुछ बनना
पड़ रही इस तरह गले दुनिया।मार डाले नहीं मुझे दुनिया। दफ़-अतन अजनबी हूँ मैं खुद में,आपके
न जाने कितने मौज हिलोरे ले रहे थे मुझ मेंजब बैठा मौन हो शांत कुछ दिनफिर ठहरा खुद के अंदर।हाँ
मन की व्यथा भावनाओं का संसार है।किंचित् मात्र भी तुमसे नहीं किसी को प्यार है।व्यर्थ की आस लिये हुए चलते