यदि आप कविता लिखना चाहते है तो सबसे पहले आपकी भावनाएँ उस अस्तर तक होनी चहिए जहाँ से कविता फूट पड़ती हैं। कविता का कोई निश्चित व्याकरण नहीं होता व्यक्ति अपनी भावनाओं को अपनी स्थानीय भाषा के माध्यम से व्यक्त करता है,यह व्यक्त करना दो तरीके से हो सकता है। एक मौखिक दूसरा लीखित अब आप अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करते हैं यही पे सारा खेल है,अपनी बातों को तो हर कोई अपनी-अपनी ढंग से रखता ही है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते जिनको बार-बार सुनने का मन करता है, कहने का मतलब उनकी बातें निराली होती हैं, उनके कहने का अंदाज़ आम लोगों से बहुत हट के होता है। आपने कभी सुना होगा या किसी फिल्म में देखा होगा कि दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे होते हैं तभी सामने वाला कुछ ऐसा कह जाता है कि सुनने वाले को थोड़ा अलग लगता है और वो अचानक ये कह पड़ता है कि ‘अच्छा ठीक है अब कविता करने की कोई जरूरत नहीं,मैं समझ गया’ मतलब बात बस इतनी है कि वो कुछ अलग तरीके से बोला सामने वाले को बेहद अच्छा लगा होगा या फिर बुरा भी लग सकता है यह तो बोलने के तरीके पे निर्भर है, क्या पता वो कुछ व्यंगात्मक बात कर गया हो कुछ भी हो पर इतना जान लीजिए ये कुछ खास तरह के लोग होते हैं जिनके अंदर कुदरत का दिया हुआ तोहफा होता है उनके बोलने की शैली में।
आप अपने दम पे अच्छा भाषण देने वाले नेता या वक्ता हो सकते हैं, बहुत पढ़ लिखकर बड़े से बड़े ओहदे को पा सकते हैं लेकिन अपने दम पे कवि नहीं हो सकते, उसके लिए आपके भींतर कुछ कुदरती तोहफा का होना भी चरूरी है, जीवन में कुछ चीज़े ऐसी भी हैं जो व्यक्ति लेकर ही पैदा होता है,जैसे किसी का कवि होना,सिंगर होना।अब देखिए ! गाना सभी गाते हैं लेकिन हर कोई लता मंगेश्कर नहीं हो सकता, हर कोई मुहम्मद रफ़ि नहीं हो सकता।
अब बात होती है कविता लिखने की तो उम्मीद है आप ऊपर दिए गाए बतों से बहुत कुछ समझ गए होंगे फिर भी अगर आपको ऐसा लगता है कि आप कविता लिख सकते हैं, आपके भीतर भी भावनाएं हिलोरे ले रही हैं तो आईए इसके कुछ नियम समझते हैं।
कविता कितने प्रकार के होते हैं।
मैं आपको बता दूँ कि कविता अनेक भाषाओं में लिखी जाती है, हमारी हिंदी भाषा की बात करे तो यहाँ कविता के मुख्यरूप से दो प्रकार हैं एक पद्य दूसरा गद्य (छंद बद्य रचना और छंद मुक्त रचना)
किसी भी रचना को संगीत बद्य बनाने के लिए सबसे पहले छंद बद्य बनाना जरूरी है, इसके कुछ नियम होते हैं। छंदबद्य रचना में मात्राओं का ध्यान रक्खा जाता है, इसकी एक अलग शैली होती है आप इसे मात्रा गणना का व्याकरण भी कह सकते हैं, हम इसकी चर्चा अगले भाग में करेंगे।
छंद मुक्त रचना:- छंदमुक्त रचनाओं में मात्रा गणना नहीं की जाती ये रचना भावना प्रधान होती हैं।
कविता लिखने के लिए पढ़ना बहुत जरूरी:-
मैं आपको बता दू कि अगर आप कविता लिखने को ठान ही लिए हैं तो कविता पढ़ना भी शुरु कर दीजिए।
बहुत पुरानी कहावत है कि एक अच्छा लेखक बनने के लिए एक अच्छा पाठक बनना बेहद जरूरी है।
इसके बहुत सारे फायदे हैं, सबसे पहले तो लेखन के प्रति आपकी उत्सुकता और तीव्र हो जाएगी, दूसरी बात आप जितना अधिक पढ़ेंगे उतना ही आपके विचारों में बदलाव होगा, आपकी कल्पना शक्ति बढ़ेगी,आप बड़े से बड़े कवियों को पढ़ेंगे और आपकी भावनाओं की गहराई बढ़ती जाएगी। अगर आप वाकई लिखना चाहते हैं तो आज से ही पढ़ना शुरु कर दे, इसके लिए कुछ खास समय का भी चुनाव करे ताकि आपकी दिनचार्या के काम भी बाधित न हो।
आज इतना ही, आगे के भाग में हम कविता को विस्तार से समझेंगे तबतक के लिए जय भारता माता की जय राम जी की